हिरण हो वन में या तरंग पवन में दीपक हो जैसे तमस सघन में मीठी भोली हँसी तुम्हारी छाव मिली हो भारी तपन में वीणा की राग या भंवरे की गुंजन शाम की वेला मे इश् का वंदन हँसना मुस्कराना खिलखिलाना तेरा पावन जैसे दमकता कुन्दन
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हँसी
Posted in कविता, साहित्य, हिन्दी, Hindi Poems, Hindi Poems: Romantic, Life, Romantic, tagged हँसी, Hindi, Literature, Maheep, Poem on जुलाई 15, 2009 | 4 Comments »