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Archive for the ‘Life’ Category

मैं मंदिर जाता हूँ हर रोज़, अब कोई मुझे शराबी नहीं कहता कलयुग हे, चलता हे; यहाँ कोई देर तक पापी नहीं रहता यूँ तो मैं सुनाता हूँ कहानी हिरण्यकश्यप की सबको पर मस्जिद के खंभो मे मुझे कभी ईश्वर नहीं दिखता मंदिर के घंटी और भजन सुरीले करता हूँ हर रोज़ तो क्या हुआ [...]

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चाँद को देखता था हर रोज़ आसमान में, कभी ये मेरे भी करीब होगा आज मुट्ठी में हे चांदनी मगर, हथेली की तक़दीर भी दिखती नहीं ———- इस कदर तेरे साथ को तरसते रहे हर दम तब तक तेरे साथ की लेकिन ये हालत होगी हमको खबर ना थी ———- कहते हैं लोग, खुदा नहीं [...]

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लोग मिलतें हैं महफिलों में, हज़ार चेहरों को बदल कर काम के वक़्त किसी भी अपने का चेहरा नहीं मिलता ———- कुछ लोग मेरे घर आये थे, गली में मंदिर बन रहा हे हर शाम मयखाने में अब भीड़ बढ़ने लगी हे ———- कुछ इस तरह का बदलाव इंसान में आया हे हर जगह उसमे [...]

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रिश्ते बहुत हैं इस संसार में, हर किसी को थोड़ा वक़्त चाहिए, मैं भी दुखी होता हूँ कभी कभी, मुझे भी किसी का प्यार चाहिए यूँ तो उन्होने मुझे थामा हे, दरिया के किनारे पर कई बार तूफ़ानी मझधार जब हो राह में, ऐसे मे भी किसी का साथ चाहिए. मैने कहा था एक बार [...]

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This poem I wrote last year during those serial blast in Mumbai, ahemdabad, jaipur, while watching some kids playing, from window of my flat in Mumbai.

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हिरण हो वन में या तरंग पवन में दीपक हो जैसे तमस सघन में मीठी भोली हँसी तुम्हारी छाव मिली हो भारी तपन में वीणा की राग या भंवरे की गुंजन शाम की वेला मे इश् का वंदन हँसना मुस्कराना खिलखिलाना तेरा पावन जैसे दमकता कुन्दन

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कुछ जादू सा हे आज इन हवाओं में, जानी पहचानी सी सरगम हे इन सदाओं मे जाने क्यों तेरी आहट सी लगती हे ये जो महक सी हे इन फिजाओं में ये वादियाँ जो गीत गुनगुनाती हे कुछ रंग नये हैं आज इन दिशाओं में तेरी याद जो जाती हे छूकर मेरे दिल को रंगत [...]

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खोया खोया हूँ कई दिनों से, किस वज़ह से मुझे पता नहीं घना अंधेरा छाया हे नभ में, पर दिखती कोई घटा नहीं राह कटे साथ हो कोई, तब मंज़िल की परवाह नहीं एक सफ़र हे लंबा लेकिन, मिला मुझे हमराह नहीं आगे चलता रहता हूँ पर, खुशियों का भी साथ नहीं अपने सारे दूर [...]

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पल पल हर्षित , हर पल गर्वित नई उड़ान और नयी अभिलाषा कर्म प्रतीक हाथों के संग हम लिखें नवीन जीवन परिभाषा मन मे गजब उत्साह लिए नयनों मे कल्पित कल की आशा भाग्य हमारा खुद लिखते हम मेहनत की हे जिसकी भाषा तपिश हमारी सह ना सकेगा तब दमक उठेगा विश्व समुचा जब विसरित [...]

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मैं नहीं जानता कहाँ जा रही हे ये जिंदगी क्यों ये धड़कने मेरी आवाज़ मुझको देती हे क्यों साँसों मे मेरी मधुर संगीत नहीं हे मंज़िल तलाशती इन नज़रों की वो आरज़ू क्या हे. शायद हाँ शायद इसी लिए आवाज़ देता हूँ एक राही को जो हमसफर बन सके एक प्यार को जो धड़कन मे [...]

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