रिश्ते बहुत हैं इस संसार में, हर किसी को थोड़ा वक़्त चाहिए, मैं भी दुखी होता हूँ कभी कभी, मुझे भी किसी का प्यार चाहिए यूँ तो उन्होने मुझे थामा हे, दरिया के किनारे पर कई बार तूफ़ानी मझधार जब हो राह में, ऐसे मे भी किसी का साथ चाहिए. मैने कहा था एक बार [...]
Archive for the ‘Gazal’ Category
रिश्ते
Posted in कविता, साहित्य, Gazal, Hindi Poems, Life, tagged रिश्ते, Hindi, Literature, Maheep, Poem, reletions, reletionship on जुलाई 30, 2009 | Leave a Comment »
अकेला
Posted in कविता, ग़ज़ल, साहित्य, हिन्दी, Gazal, Hindi Poems, Life, tagged Hindi, Literature, Maheep, Poem on अप्रैल 8, 2009 | Leave a Comment »
खोया खोया हूँ कई दिनों से, किस वज़ह से मुझे पता नहीं घना अंधेरा छाया हे नभ में, पर दिखती कोई घटा नहीं राह कटे साथ हो कोई, तब मंज़िल की परवाह नहीं एक सफ़र हे लंबा लेकिन, मिला मुझे हमराह नहीं आगे चलता रहता हूँ पर, खुशियों का भी साथ नहीं अपने सारे दूर [...]
मुझसे नाराज़ ना हो
Posted in कविता, ग़ज़ल, साहित्य, हिन्दी, Gazal, Hindi Poems, Hindi Poems: Romantic, Romantic, tagged Hindi, Literature, Maheep, Poem, Sher on मार्च 26, 2009 | 1 Comment »
बस एक बार बता दे ग़लती मेरी, चाहे फिर कभी बात ना हो मुस्करा दे एक बार अब तो, इस तरह मुझसे नाराज़ ना हो तड़पता हे पंछी कोई जब, पँखो में उसके परवाज़ ना हो हालत हे मेरी भी वो ही, तू अब तो यूँ नाआवाज़ ना हो नज़र नहीं आता कोई तेरे बिन, [...]
यादें
Posted in कविता, ग़ज़ल, साहित्य, हिन्दी, Gazal, Hindi Poems, Hindi Poems: Romantic, Romantic, tagged Hindi, Literature, Maheep, Poem, Sher on मार्च 19, 2009 | 4 Comments »
अब समझ में आया लोग चाँद को खूबसूरत क्यों कहते हैं शायद मेरी तरह वो भी उसमे तेरी ही झलक को देखते हैं शाम होते ही आ जातें हर महफ़िल से बाहर अब हम मैं और मेरी तन्हाई तेरी हर बिखरी याद को हर रोज़ समेटतें हैं एक अरसा हुआ देखा नहीं तुझे किसी ख्वाब [...]
शिकायत
Posted in कविता, साहित्य, हिन्दी, Gazal, Hindi Poems, Hindi Poems: Romantic, Romantic, tagged Hindi, Literature, Maheep, Poem on फ़रवरी 3, 2009 | Leave a Comment »
हर महफ़िल मे साथ ले जाता हूँ काफिला यादों की उनकी और वो कहते हें कि हम उन्हे याद नहीं करते सामने आते ही होशो हवास उड़ जाते हैं मेरे और वो कहते हैं कि हम उनसे बात नहीं करते खामोशियाँ ही गुनगुनाती है हर मुलाकात में अक्सर लफ्ज़ मिलते नहीं और, वो हमारी तरफ [...]
ख्वाबों में आती हे रोजाना
Posted in ग़ज़ल, साहित्य, हिन्दी, Gazal, Hindi Poems, Romantic, tagged Hindi, Literature, Maheep, Poem on दिसम्बर 16, 2008 | Leave a Comment »
ख्वाबों में आती हे रोजाना, कभी सामने ना आना, छलक जाएगा जो सागर आंखों में हैं . फिर होश में ना आऊंगा क़यामत की रात तक,गर जी लूँ वो लम्हा जो मेरी यादों में है. गूँज रही हे कानों मैं ग़ज़ल की तरह, ये खनक जो तेरी बातों में हे. हँसी लबों पर, आँखों में [...]