ना बहा इस आँखो से अश्कों को बार बार ज़माने को इनकी कहीं आदत ना हो जाए बूँद रेगिस्तान में लगती हे रहमत की तरह समंदर मे बूँद कभी बूँद भी ना रह पाए —————————— तेरे चेहरे पर ये गुस्सा ग़ज़ब हे, बहुत सताता हे याद तो इसकी भी आती हे, तेरे जाने के बाद —————————— [...]
Archive for मार्च, 2010
कुछ और ख्याल…
Posted in कविता, साहित्य, हिन्दी, Hindi Poems, Hindi Poems: Romantic, Romantic, tagged शायरी, Hindi, Literature, Maheep, Maheep Saraf, Poem, Sher on मार्च 20, 2010 | 1 Comment »