आज तेरी याद आ रही हे
हर पहर हर पल, जाने क्यों
तेरे सामने आया था कई बार
पर कुछ कहा नहीं जाने क्यों
चेहरे कई दिखते हैं सरे बाज़ार
अकेला निकलता हूँ जब मैं
पर तेरे चेहरे की यादें
मिटती नहीं हैं अब भी, जाने क्यों
नवम्बर 5, 2009 Maheep Saraf द्वारा
आज तेरी याद आ रही हे
हर पहर हर पल, जाने क्यों
तेरे सामने आया था कई बार
पर कुछ कहा नहीं जाने क्यों
चेहरे कई दिखते हैं सरे बाज़ार
अकेला निकलता हूँ जब मैं
पर तेरे चेहरे की यादें
मिटती नहीं हैं अब भी, जाने क्यों