लोग मिलतें हैं महफिलों में, हज़ार चेहरों को बदल कर
काम के वक़्त किसी भी अपने का चेहरा नहीं मिलता
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कुछ लोग मेरे घर आये थे, गली में मंदिर बन रहा हे
हर शाम मयखाने में अब भीड़ बढ़ने लगी हे
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कुछ इस तरह का बदलाव इंसान में आया हे
हर जगह उसमे शैतान उभर आया हे
घरों से मार कर निकल दिया गरीबों को
उसी जगह पर आलिशान मंदिर बनाया हे
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गज़ब सी दोस्ती हे तेरी यादों की मेरी सांसों के साथ
साथ में आती दोनों, कभी एक साथ रुक जायेगी.
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धुंधलाई सी हे नज़र मेरी, कुछ खबर नहीं इन राहों की.
कोई बरगद नहीं मिला और, बड़ी प्यास लगी हे छाँव की
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तनहाइयों के आकाश मैं कब से पंख फैलाए उड़ रहा हूँ.
पर दूर दूर तक जमीं दिखती नहीं ग़मों के बादलों के बीच.
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मैं बहुत उदास हूँ आजकल, मेरा मित्र मुझे सत्कार नहीं देता
कई मौके आये मेरी जिंदगी में, वो मुझे कोई उपहार नहीं देता
हाँ वो मेरे साथ हर बार अकेला होता हे उस दिन सड़क पर
जब घने अँधेरे में मेरा साया भी मेरा साथ नहीं देता
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अश्क बह जाते हैं आँखों से, तेरे दिल में उतर जाने को
तू कमबख्त देखता ही नहीं, दर्द-ऐ-दिल के इस नज़ारे को
तेरी खातिर दुनिया से लड़ जाता हे ये दिल
और तू मशगूल हे, तमाशे पे तालियाँ बजाने को.
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इस तरह से से मुझे नज़रंदाज़ न कर, तेरे दीवानों में कोई मुझसा न होगा.
यूँ तो तारे हैं आसमान में हजारों, आफ़ताब-ऐ-सहर(Morning sun) सा कोई दूसरा ना होगा
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एक किस्सा हूँ या हयात-ऐ-दिल(World of Heart) तेरा, इस बात का कोई मुझे ग़म नहीं
गाली भी निकले मेरे नाम के साथ, तो अता-ऐ-खुदा(Gift of GOD) से कम नहीं
« रिश्ते
शायरी/मुक्तक
अक्टूबर 6, 2009 Maheep Saraf द्वारा
GUd 1 boss…
Quite Deep thought….
:- B!t’s
बहुत ही प्यारा लिखा है आप ने!!
maan gaye guru aapki sooch ko hats off to myou buddy …. keep it …up bosss
अपनी निगाहों से ना देख खुद को ,
के हिरा भी तुम्हे पत्थर लगेगा ,
लोग कहते हें की चाँद का टुकडा है तू ,
हमारी नज़रों से देख चाँद तेरा टुकडा लगेगा …
नैनो मे बसे है ज़रा याद रखना,
अगर काम पड़े तो याद करना,
मुझे तो आदत है आपको याद करने की,
अगर हिचकी आए तो माफ़ करना…….
ये दुनिया वाले भी बड़े अजीब होते है
कभी दूर तो कभी क़रीब होते है
दर्द ना बताओ तो हमे कायर कहते है
और दर्द बताओ तो हमे शायर कहते है …….
एक मुलाक़ात करो हमसे इनायत समझकर,
हर चीज़ का हिसाब देंगे क़यामत समझकर,
मेरी दोस्ती पे कभी शक ना करना,
हम दोस्ती भी करते है इबादत समझकर………
ख़ामोशियों की वो धीमी सी आवाज़ है ,
तन्हाइयों मे वो एक गहरा राज़ है ,
मिलते नही है सबको ऐसे दोस्त ,
आप जो मिले हो हमे ख़ुद पे नाज़
zindagi mein bahut se aise pal aate hai jab ahsaas ko lafz nahi milte………par kuch ahsaas jinhe aapne lafz diye uske liye tah-e-dil se shukriya