मैं मंदिर जाता हूँ हर रोज़, अब कोई मुझे शराबी नहीं कहता
कलयुग हे, चलता हे; यहाँ कोई देर तक पापी नहीं रहता
यूँ तो मैं सुनाता हूँ कहानी हिरण्यकश्यप की सबको
पर मस्जिद के खंभो मे मुझे कभी ईश्वर नहीं दिखता
मंदिर के घंटी और भजन सुरीले करता हूँ हर रोज़
तो क्या हुआ अगर मे बूढ़ी माँ की सेवा नहीं करता
यूँ तो मेने भी एक बार भगवान को देखा हे
पर कभी वो ही चेहरा मंदिरों में नहीं दिखता
aaj kal मंदिर ??????????????????????????