बस एक बार बता दे ग़लती मेरी, चाहे फिर कभी बात ना हो मुस्करा दे एक बार अब तो, इस तरह मुझसे नाराज़ ना हो तड़पता हे पंछी कोई जब, पँखो में उसके परवाज़ ना हो हालत हे मेरी भी वो ही, तू अब तो यूँ नाआवाज़ ना हो नज़र नहीं आता कोई तेरे बिन, [...]
Archive for मार्च, 2009
मुझसे नाराज़ ना हो
Posted in कविता, ग़ज़ल, साहित्य, हिन्दी, Gazal, Hindi Poems, Hindi Poems: Romantic, Romantic, tagged Hindi, Literature, Maheep, Poem, Sher on मार्च 26, 2009 | 1 Comment »
यादें
Posted in कविता, ग़ज़ल, साहित्य, हिन्दी, Gazal, Hindi Poems, Hindi Poems: Romantic, Romantic, tagged Hindi, Literature, Maheep, Poem, Sher on मार्च 19, 2009 | 4 Comments »
अब समझ में आया लोग चाँद को खूबसूरत क्यों कहते हैं शायद मेरी तरह वो भी उसमे तेरी ही झलक को देखते हैं शाम होते ही आ जातें हर महफ़िल से बाहर अब हम मैं और मेरी तन्हाई तेरी हर बिखरी याद को हर रोज़ समेटतें हैं एक अरसा हुआ देखा नहीं तुझे किसी ख्वाब [...]